BhaktiVed
कृष्ण

राय रणछोडने नमुं कर जोडीने

भजनरचना: નરસિંહ મહેતા (Narsinh Mehta)
लिपि
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स्रोत
Gujarati Wikisource, https://gu.wikisource.org/wiki/રાય_રણછોડને_નમું_કર_જોડીને (revision 207540)
स्रोत का विवरण
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राय रणछोडने नमुं कर जोडीने

राय रणछोडने नमुं कर जोडीने, सारा करो श्री हरि! चरणे आव्यो,

तन-मन-प्राणने समर्प्यां धर थकी, शरण आवे तेनो हाथ शावो. - राय. १

नागरी नाते तो कीधी छे ठेकडी, तीरथवासीए जाण्युं साचुं,

नरसैंयो भक्त ते कोटिध्वज जाणियो, तम विना कृष्णजी ! केने जाचुं ? - राय. २

जो नकारशो तमो दासनी हुंडी तो लोकमांहे उपहास थाशे,

मारुं तो एहमां कामी नहीं वणसशे,पण ताहरा भक्तनी लाज जाशे. - राय. ३

न-काळजो वणज में कीधो छे विठ्ठला! राखजो लाज तो शरम रहेशे,

जो हूंडी पाछी फरी आवशे, तो भक्तवत्सल तने कोण कहेशे ? - राय. ४

आधीन दास छुं, शामळा ! श्री हरि ! दीनबंदु दीनानाथ कहावो,

नाम -प्रतापथी अधम जन उद्धर्यां, ते माटे दास करे छे दावो. - राय. ५

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