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कृष्ण

कृष्ण ध्यान श्लोक (कस्तूरी तिलकं)

स्तोत्र
लिपि
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कस्तूरी तिलकं ललाटपटले, वक्षःस्थले कौस्तुभं।

नासाग्रे वरमौक्तिकं करतले, वेणुं करे कंकणम्॥

सर्वांगे हरिचन्दनं सुललितं, कण्ठे च मुक्तावलिं।

गोपस्त्रीपरिवेष्टितो विजयते, गोपालचूडामणिः॥

वसुदेवसुतं देवं, कंसचाणूरमर्दनम्।

देवकीपरमानन्दं, कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्॥

मूकं करोति वाचालं, पङ्गुं लङ्घयते गिरिम्।

यत्कृपा तमहं वन्दे, परमानन्दमाधवम्॥

कृष्णाय वासुदेवाय, हरये परमात्मने।

प्रणतक्लेशनाशाय, गोविन्दाय नमो नमः॥

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