BhaktiVed
कृष्ण

उधडकी ऊठिया वेगे विठ्ठल हरि

भजनरचना: નરસિંહ મહેતા (Narsinh Mehta)
लिपि
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स्रोत
Gujarati Wikisource, https://gu.wikisource.org/wiki/ઉધડકી_ઊઠિયા_વેગે_વિઠ્ઠલ_હરિ (revision 207546)
स्रोत का विवरण
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उधडकी ऊठिया वेगे विठ्ठल हरि

उधडकी ऊठिया वेगे विठ्ठल हरि, 'गरूड क्यां गरूड क्यां?' वदत वाणी,

'चाल, चतुरा ! चतुर्भुज भणे, भामिनी ! नेष्ट नागरे मारी गत न जाणी - उधडकी. १

चीर -छायल घणा, वस्त्र विधविध तणा, एक पें एक अधिक जाणो,

स्वप्ने जे नव चडे नाम जेनुं नव जडे, अंग आळस तजीने रे आणो. - उधडकी. २

हेम हाथ - सांकळा, नंग बहु निर्मळा, सुभग शणगार अंग सोहे सारो.

रीत ए भातमां रोकड रखे विसरो, दीन थई करगरे दास मारो. - उधडकी. ३

ईन्द्र ब्रह्मा जेने स्वप्ने देखे नहीं, ते 'माग रे माग' वदत वाणी,

नरसैंयानो नाथ लक्ष्मी सहित आवियो अणगणी गोठडी अनेक आणी. - उधडकी. ४

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