BhaktiVed
विष्णु

वैष्णवजन तो तेने रे कहीये

भजनरचना: નરસિંહ મહેતા (Narsinh Mehta)
लिपि
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स्रोत
Gujarati Wikisource, https://gu.wikisource.org/wiki/વૈષ્ણવજન_તો_તેને_રે_કહીયે (revision 216947)
स्रोत का विवरण
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पद ११७ राग एज.

वैष्णवजन तो तेने रे कहीये, जे पीड पराई जाणे रे.

परदुःखे उपकार करे तोये, मन अभिमान न आणे रे. — वैष्णव १.

सकळ लोकमां सहुने वंदे, निंदा न करे केनी रे.

वाच काछ मन निश्चल राखे, धन धन जननी तेनी रे. — वैष्णव २.

समद्रष्टिने तृष्णा त्यागी, परस्त्री जेने मात रे.

जिह्वा थकी असत्य न बोले, परधन नव झाले हाथ रे.— वैष्णव ३.

मोह माया व्यापे नहि जेने, द्रढ वैराग्य जेना मनमां रे.

राम नाम शुं ताळी रे वागी, सकळ तिरथ तेना तनमां रे. — वैष्णव ४.

वणलोभी ने कपट रहित छे, काम क्रोध निवार्या रे.

भणे नरसैयो तेनुं दर्शन करता, कुळ ईकोतेर तार्या रे. — वैष्णव ५.

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