BhaktiVed
ॐ

वीणवो होय तो रस

भजनरचना: ગંગાસતી (Gangasati)
लिपि
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स्रोत
Gujarati Wikisource, https://gu.wikisource.org/wiki/વીણવો_હોય_તો_રસ (revision 199990)
स्रोत का विवरण
Text taken from the Wikisource transcription; script-converted to Devanagari

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वीणवो होय तो रस

वीणवो होय तो रस वीणी लेजो पानबाई!

हवे आव्यो बराबर वखत;

ऊभां रे थाव पानबाई! शूरवीरपणुं राखो,

हवे लांबो नथी कांई पंथ ... वीणवो.

आ रस-पात्र अगम अपार छे पानबाई,

कोईने कह्यो नव जाय;

ए रस हुं तमने बतावुं पानबाई!

मारी पूरण थई छे दयाय .... वीणवो.

आ अजर रस कोईथी जरे नहि पानबाई!

अधूराने आप्ये ढोळाई जाय,

पीओने पियालो प्रेम करी पानबाई!

त्यारे लेर समाय ... वीणवो.

आप्यो रस ने खोळामां बेसाड्यां,

मूक्यो रे मस्तक उपर हाथ,

गंगा रे सती एम बोलियां रे, त्यां तो

निरख्या त्रिभुवननाथ ... वीणवो.

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