BhaktiVed
कृष्ण

चित्त तुं शीदने चिंता धरे

भजनरचना: દયારામ (Dayaram)
लिपि
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स्रोत
Gujarati Wikisource, https://gu.wikisource.org/wiki/ચિત્ત_તું_શીદને_ચિંતા_ધરે (revision 204517)
स्रोत का विवरण
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चित्त तुं शीदने चिंता धरे

चित्त तुं शीदने चिंता धरे ?

कृष्णने करवुं होय ते करे !

स्थावर जंगम जड चेतनमां मायानुं बळ ठरे;

स्मरण कर श्रीकृष्णचंद्रनुं, जन्म मरण भय हरे

कृष्णने करवुं होय ते करे !

नव मास प्राणी श्रीकृष्णनुं, ध्यान गर्भमां धरे;

मायानुं आवरण कर्युं त्यारे, लख चोराशी फरे

कृष्णने करवुं होय ते करे !

तुं अंतर उद्वेग धरे, तेथी कारज शुं सरे ?

धणीनो धार्यो मनसूबो, हर ब्रह्माथी नव फरे

कृष्णने करवुं होय ते करे !

दोरी सर्वनी एना हाथमां, भराव्युं डगलुं भरे;

जेवो जंत्र बजावे जंत्री तेवो स्वर नीसरे

कृष्णने करवुं होय ते करे !

थनार वस्तु थया करे, ज्यम श्रीफळ पाणी भरे;

जनार वस्तु एणी पेरे जाशे, ज्यम गज कोळुं गळे

कृष्णने करवुं होय ते करे !

जेनुं जेटलुं जे ज्यम काळे, ते तेने कर ठरे;

एमां फेर पडे नहीं कोईथी, शीद कुंटाई तुं मरे

कृष्णने करवुं होय ते करे !

तारुं धार्युं थातुं होय तो, सुख संचे दुःख हरे;

आप तणुं अज्ञानपणु ए, मूळ विचारे खरे

कृष्णने करवुं होय ते करे !

थावानुं अणचिंतव्युं थाशे, उपनिषद ओचरे;

राख भरोसो राधावरनो, दया शीदने डरे ?

कृष्णने करवुं होय ते करे !

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