BhaktiVed
ॐ

घालीन लोटांगण वंदीन चरण

स्तोत्ररचना: संत नामदेव, आदि शंकराचार्य, संत तुकाराम (composite)Sung after aarti, before mantra pushpanjali
लिपि
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स्रोत
Composite closing prayer: Namdev abhang (13th c.), Shankaracharya shloka, Tukaram abhang; sung after every Marathi aarti

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घालीन लोटांगण वंदीन चरण।

डोळ्यांनी पाहीन रूप तुझे॥

प्रेमे आलिंगन आनंदे पूजीन।

भावे ओवाळीन म्हणे नामा॥

त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव।

त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव, त्वमेव सर्वं मम देवदेव॥

कायेन वाचा मनसेन्द्रियैर्वा, बुद्ध्यात्मना वा प्रकृतिस्वभावात्।

करोमि यद्यत् सकलं परस्मै, नारायणायेति समर्पयामि॥

अच्युतं केशवं रामनारायणं, कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरिम्।

श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं, जानकीनायकं रामचन्द्रं भजे॥

हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे।

हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे॥

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