BhaktiVed
कृष्ण

हरिजन होय तेणे...

भजनरचना: ભાણ સાહેબ (Bhan Saheb)
लिपि
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स्रोत
Gujarati Wikisource, https://gu.wikisource.org/wiki/હરિજન_હોય_તેણે... (revision 206718)
स्रोत का विवरण
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हरिजन होय तेणे...

हरिजन होय तेणे हेत घणुं राखवुं,

निज नाम ग्राही निर्मात रहेवुं;

त्रिविधना ताप ते जाप जरणा करी,

परहरि पाप रामनाम लेवुं.

सौने सरस कहेवुं, पोताने नरस थवुं,

आप आधिन थई दान देवुं.

मन करम वचने करी निज धर्म आदरी,

दाता भोक्ता हरि एम रहेवुं.

अडग नव डोलवुं, अधिक नव बोलवुं,

खोलवी गूज ते पात्र खोळी;

दीन वचन दाखवुं, गंभीर मतुं राखवुं,

विवेकीने वात नव करवी पहोळी.

अनंत नाम उच्चारवुं, तरवुं ने तारवुं,

राखवी भक्ति ते रांक दावे,

भक्त भोजो कहे गुरुपरतापथी

त्रिविधना ताप त्यां निकट ना’वे.

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