BhaktiVed
शिव

हवे सखी नहि बोलुं

भजनरचना: દયારામ (Dayaram)
लिपि
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स्रोत
Gujarati Wikisource, https://gu.wikisource.org/wiki/હવે_સખી_નહિ_બોલું (revision 195405)
स्रोत का विवरण
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हवे हुं सखी नहीं बोलुंरे, कदापि नंदकुंवरनी संगे;

मुंने शशिवदनी कहीछेरे, त्यारनी दाझ लागी छे अंगे. हवे.

चंद्रबिंबमां लांछन छे वळी, राहु गळे खटमासेरे;

पक्षे वधे ने पक्षे घटे कळा पूरण, नित्य ते नव परकाशे. हवे.

ते करतां चंद्रवदनी कही तो ठर्यां, हुं ने चंद्र एकरासेरे;

त्यारे मुज मुख पाखे शुं अटक्युं, छे जोशे चंद्र आकाशे. हवे

नहि तो शिवने समीप राखशे ने, भाले चंद्र देखाशेरे;

प्रसंन थई पासे रहेशे नहि तो, कहेवाय नहीं निज दासे. हवे

एवडो श्रम पण शीद करे जुओ, चंद्र पोतानी पासे;

वाम चरणमां ईंदु अचळ छे, शीद रहे अन्यनी आशे. हवे.

दयाना प्रीतमने कहेसखी जुओ, शशिमुख सरखुंसुख पासे;

कोटी प्रकारे हुं नहीं आवुं, एवा पुरुषनी अडासे. हवे.

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