BhaktiVed
ॐ

आज रंग है री माँ

భజనరచన: अमीर खुसरो (Amir Khusro)

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आज रंग है री माँ, रंग है री।

मोरे महबूब के घर रंग है री॥

सजन मिलावरा इस आँगन में, आज रंग है री माँ, रंग है री।

मोहे पीर पायो निजामुद्दीन औलिया, आज रंग है री॥

देस बिदेस में ढूँढ फिरी हूँ, तोरा रंग मन भायो निजामुद्दीन।

जग उजियारो जगत उजियारो, मैं तो ऐसो रंग और नहीं देख्यो॥

आज रंग है री माँ, रंग है री।

मोरे महबूब के घर रंग है री॥

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మూలం: Amir Khusro, traditional sufi kalam; text as commonly sung

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