BhaktiVed
कृष्ण

हरि तुम हरो जन की भीर

भजनरचना: मीराबाई (Meera Bai)Raag Darbari; sung at Gandhi's prayer meetings

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हरि तुम हरो जन की भीर।

द्रोपदी की लाज राखी, तुम बढ़ायो चीर॥

भक्त कारण रूप नरहरि, धरयो आप सरीर।

हिरनकस्यप मारि लीन्हो, धरयो नाहिंन धीर॥

बूड़तो गजराज राख्यो, कियो बाहर नीर।

दासी मीरा लाल गिरिधर, दुःख जहाँ तहँ पीर॥

स्रोत: Meera Bai pad; standard Meera Padavali text as commonly sung

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