BhaktiVed
कृष्ण

श्याम मने चाकर राखो जी

भजनरचना: मीराबाई (Meera Bai)

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श्याम मने चाकर राखो जी।

गिरिधारी लाला, चाकर राखो जी॥

चाकर रहसूँ बाग लगासूँ, नित उठ दरसण पासूँ।

बृन्दाबन की कुंज गलिन में, गोविन्द लीला गासूँ॥

श्याम मने चाकर राखो जी।

चाकरी में दरसण पाऊँ, सुमिरण पाऊँ खरची।

भाव भगति जागीरी पाऊँ, तीनूँ बाताँ सरसी॥

श्याम मने चाकर राखो जी।

मोर मुकुट पीताम्बर सोहे, गल बैजन्ती माला।

बृन्दाबन में धेनु चरावे, मोहन मुरली वाला॥

श्याम मने चाकर राखो जी।

ऊँचे ऊँचे महल बनाऊँ, बिच बिच राखूँ बारी।

साँवरिया रा दरसण पाऊँ, पहर कुसुम्बी सारी॥

श्याम मने चाकर राखो जी।

आधी रात प्रभु दरसण दीज्यो, जमना जी रे तीरा।

मीरा रा प्रभु गिरिधर नागर, हिवड़ो घणो अधीरा॥

श्याम मने चाकर राखो जी।

स्रोत: Meera Bai pad; standard Meera Padavali text as commonly sung

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