BhaktiVed
कृष्ण

प्राण थकी मने वैष्णव व्हाला

भजनरचना: નરસિંહ મહેતા (Narsinh Mehta)
लिपि
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स्रोत
Gujarati Wikisource, https://gu.wikisource.org/wiki/પ્રાણ_થકી_મને_વૈષ્ણવ_વ્હાલા (revision 196210)
स्रोत का विवरण
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पद १०८ राग प्रभातियुं.

प्राण थकी मने वैष्णव वाहाला, हरनिश एने गाउं रे,

तपतीरथ वैकुंठ पद मूकी, मारा भक्त बोलावे त्यां जाउं रे— प्रा. १.

अंबरीष राजा मुने अतिघणो वहालो, दुवार्साए मन भंग कीधुं रे,

में मारूं भिमान तजीने, चक्र दर्शन लीधो रे— प्रा. २.

गजने कारण पाळो रे धायो, संतोनी करवा सार रे.

ऊंचनीच हुं तो कांई नव जाणुं, मने भजे ते मारा रे.— प्रा. ३.

लक्ष्मीजी अर्धांगना मारी, पण मारा संतनी दासीरे;

अडसठ तीरथ मारा संतने चरणे, कोटि गंगा कोटि काशीरे. .— प्रा. ४.

संत चाले त्यां हुं आगळ चालुं, ने संत सूए तो हुं जागुं रे;

मारा संतनी निंदा करे तेनी, जीह्‌वा सद्यज कापुं रे. — प्रा. ५

मारारे बंध्या वैष्णव छोडे, वैष्णवे मांध्या मे नव छूटे रे,

एकवार वैष्णव मने बांधे तो, ते बंधन में नव तूटे रे.— प्रा. ६.

बेसी गाय त्यां हुं ऊभो सांभळुं, ऊभा गाय त्यां हुं नाचुं रे

हुंतो वैष्णवथी क्षण नहीं अळगो, भणे नरसैंयो साचुं रे.— प्रा. ७.

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