BhaktiVed
कृष्ण

प्रेमरस

भजनरचना: દયારામ (Dayaram)
लिपि
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स्रोत
Gujarati Wikisource, https://gu.wikisource.org/wiki/પ્રેમરસ (revision 204520)
स्रोत का विवरण
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प्रेमरस

जे कोई प्रेमअंश अवतरे, प्रेमरस तेना उरमां ठरे.

सिंहण केरुं दूध होय ते सिंहणसुतने जरे,

कनकपात्र पाखे सहु धातु फोडीने नीसरे. – जे कोई०

सक्करखोरनुं साकर जीवन, खरना प्राण ज हरे,

क्षारसिंधुनुं माछलडुं जेम मीठा जळमां मरे. – जे कोई०

सोमवेली रसपान शुद्ध जे ब्राह्मण होय ते करे;

वगळवंशीने वमन करावे, वेदवाणी ऊचरे. – जे कोई०

उत्तम वस्तु अधिकार विना मळे, तदपि अर्थ ना सरे,

मत्स्यभोगी बगलो मुक्ताफळ देखी चंचु ना भरे. – जे कोई०

एम कोटि साधने, प्रेम विना पुरुषोत्तम पूंठ ना फरे,

दयाप्रीतम श्रीगोवर्धनधर, प्रेमभक्तिए वरे. – जे कोई०

समानार्थी

(कनकपात्रसुवर्णपात्र, सक्करखोरसाकर खानार जीवडो, खरगधेडो, वगळवंशीवर्णसंकर, वमनऊलटी, मुक्ताफळमोती)

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