BhaktiVed
शिव

शीख करी शंकरे

भजनरचना: નરસિંહ મહેતા (Narsinh Mehta)
लिपि
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स्रोत
Gujarati Wikisource, https://gu.wikisource.org/wiki/શીખ_કરી_શંકરે (revision 207553)
स्रोत का विवरण
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शीख करी शंकरे

शीख करी शंकरे, हरखी कह्यु श्रीवरे; 'भूतळे जई गुण मारा गाजे,

भूतळे जन जे रसिक छे हरि तणा, ते हने ए रस तुं रे पाजे - शीख. १

मास एक राखीने विदय कर्योदासने, आवीने भाभीने लाग्यो पाये,

श्री हरि-हर हुंने जे मळ्यां सांभळो; 'मात - मारी! ते तारी कृपाए -शीख. २

नित्य कीर्तन करे, ताळ करमां धरे, देशमां दासनी वात वागी,

गाम गामे थकी. हरिजन आवतां, दर्शन करवाए ल्हार लागी. - शीख. ३

भाई भोजाई अकळाईने एम कहे; ' हवे तमो अम थकीदूर रहीए',

महेताजी पछे तहां कहे निजनारने; 'नगर जूनागढ मांहे जईए.' - शीख.४

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