BhaktiVed
कृष्ण

मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो

भजनरचना: सूरदास (Surdas)Bal-lila pad; sung at Janmashtami

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मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो।

ख्याल परै ये सखा सबै मिलि, मेरे मुख लपटायो।

मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो।

भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहिं पठायो।

चार पहर बंसीबट भटक्यो, साँझ परे घर आयो॥

मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो।

मैं बालक बहियन को छोटो, छींको किहि बिधि पायो।

ग्वाल बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो॥

मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो।

तू जननी मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो।

जिय तेरे कछु भेद उपजि है, जानि परायो जायो॥

मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो।

यह लै अपनी लकुटि कमरिया, बहुतहिं नाच नचायो।

सूरदास तब बिहँसि जसोदा, लै उर कंठ लगायो॥

मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो।

स्रोत: Surdas, Sursagar (Bal-lila); text as in the Nagari Pracharini Sabha edition and as commonly sung

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