BhaktiVed
ॐ

सुमिरन कर ले मेरे मना

भजन

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सुमिरन कर ले मेरे मना, तेरी बीती उमर हरि नाम बिना।

कूप नीर बिन, धेनु छीर बिन, धरती मेघ बिना।

जैसे तरुवर फल बिन हीना, तैसे प्राणी हरि नाम बिना॥

सुमिरन कर ले मेरे मना।

देह नैन बिन, रैन चन्द्र बिन, मन्दिर दीप बिना।

जैसे पण्डित वेद विहीना, तैसे प्राणी हरि नाम बिना॥

सुमिरन कर ले मेरे मना।

काम क्रोध मद लोभ निवारो, छाड़ो संग दुर्जना।

कहे नानक सुन भगवन्ता, या जग में नहिं कोई अपना॥

सुमिरन कर ले मेरे मना।

स्रोत: Traditional satsang bhajan (attributed variously to Kabir and to Guru Nanak); text as commonly sung