BhaktiVed
राम

दीन दयाल बिरिदु सँभारी

भजनरचना: गोस्वामी तुलसीदास (Goswami Tulsidas)

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दीन दयाल बिरिदु सँभारी।

हरहु नाथ मम संकट भारी॥

पाहि पाहि प्रभु, राम कृपाला।

हौं कृपात्र तुम कृपा निधाला॥

दीन दयाल बिरिदु सँभारी।

हरहु नाथ मम संकट भारी॥

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स्रोत: Tulsidas, Vinay Patrika, pad 109; Gita Press edition

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