BhaktiVed
माता

कबहुँक अम्ब अवसर पाइ

भजनरचना: गोस्वामी तुलसीदास (Goswami Tulsidas)

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कबहुँक अम्ब, अवसर पाइ।

मेरिऔ सुधि द्याइबी, कछु करुन-कथा चलाइ॥

दीन, सब अँगहीन, छीन, मलीन, अघी अघाइ।

नाम लै भरै उदर एक प्रभु-दासी-दास कहाइ॥

कबहुँक अम्ब, अवसर पाइ।

बूझिहैं 'सो है कौन', कहिबी नाम दसा जनाइ।

सुनत राम कृपालु के मेरी बिगरिऔ बनि जाइ॥

कबहुँक अम्ब, अवसर पाइ।

जानकी जगजननि जन की किये बचन सहाइ।

तरै तुलसीदास भव तव-नाथ-गुन-गन गाइ॥

कबहुँक अम्ब, अवसर पाइ।

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स्रोत: Tulsidas, Vinay Patrika, pad 38 (Sita stuti); Gita Press edition