BhaktiVed
शिव

तुं किशा ठाकुरा ?

भजनरचना: નરસિંહ મહેતા (Narsinh Mehta)
लिपि
अक्षर आकार

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स्रोत
Gujarati Wikisource, https://gu.wikisource.org/wiki/તું_કિશા_ઠાકુરા_? (revision 196204)
स्रोत का विवरण
Text taken from the Wikisource transcription; script-converted to Devanagari

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तुं किशा ठाकुरा ? हुं किशा सेवका? जो कर्मचा लेख भूंस्या न जाये;

मंडळिक हारने माटे मने बहु दमे, छबिला विना दुःख कोने कहाये ? - तुं किशा. १

को'कहे लंअटी को कहे लोभियो, को कहे तालकूटियो ते खोटो,

सार कर माहरी, दीन जाणी जरि ! हार आपो कहुं नाथ मोटो- तुं किशा. २

बे पासा सुंदरी, कांठे बांहो धरी, केशवा ! कीर्तन एम होये,

अज्ञान लोक ते अशुभ वाणी वदे, पूर्ण जे भक्त ते प्रेम जोये - तुं किशा. ३

जहीं महादेवजीए पूर्ण कृपा करी, तहींनो में लक्ष्मीनाथ गायो,

मामेरा वेळा लाजजाती हूती, गरूड मेलीने तुं चरणे धायो.- तुं किशा. ४

मुंने वेवाईए अतिशय वगोवियो, उष्ण जळ मूकीने हास कीधुं,

द्वाद्रश मेघ ! तें मोकल्या श्रीहरि ! आपणा दासने मान लीधुं.- तुं किशा. ५

सोरठ मंहे मुंने सहुए साचो कह्यो, पुत्रीने मामेरुं वारु कीधुं,

नागरी नातमां ईंडुं अडावियुं नरसैयाने अभेदान दीधुं. - तुं किशा. ६

तुं किशा ठाकुरा ? हुं किशा सेवका? जो कर्मचा लेख भूंस्या न जाये;

मंडळिक हारने माटे मने बहु दमे, छबिला विना दुःख कोने कहाये ? - तुं किशा. १

को'कहे लंअटी को कहे लोभियो, को कहे तालकूटियो ते खोटो,

सार कर माहरी, दीन जाणी जरि ! हार आपो कहुं नाथ मोटो- तुं किशा. २

बे पासा सुंदरी, कांठे बांहो धरी, केशवा ! कीर्तन एम होये,

अज्ञान लोक ते अशुभ वाणी वदे, पूर्ण जे भक्त ते प्रेम जोये - तुं किशा. ३

जहीं महादेवजीए पूर्ण कृपा करी, तहींनो में लक्ष्मीनाथ गायो,

मामेरा वेळा लाजजाती हूती, गरूड मेलीने तुं चरणे धायो.- तुं किशा. ४

मुंने वेवाईए अतिशय वगोवियो, उष्ण जळ मूकीने हास कीधुं,

द्वाद्रश मेघ ! तें मोकल्या श्रीहरि ! आपणा दासने मान लीधुं.- तुं किशा. ५

सोरठ मंहे मुंने सहुए साचो कह्यो, पुत्रीने मामेरुं वारु कीधुं,

नागरी नातमां ईंडुं अडावियुं नरसैयाने अभेदान दीधुं. - तुं किशा. ६

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