BhaktiVed
कृष्ण

उमिया-इशनी मुजने

भजनरचना: નરસિંહ મહેતા (Narsinh Mehta)
लिपि
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स्रोत
Gujarati Wikisource, https://gu.wikisource.org/wiki/ઉમિયા-ઇશની_મુજને (revision 207505)
स्रोत का विवरण
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उमिया-इशनी मुजने

उमिया-इशनी मुजने किरपा हवी, जोजो भाइओ ! मारुं भाग्य मोटुं;

कीडी हतो ते कुंजर थई ऊठियो, पूरण ब्रह्म - शुं ध्यान चोंट्युं.

हाथ साह्यो मारो पारवती-पते, मुक्तिपुरी मने सद्य देखाडी;

कनकनी भोम, विद्रुमना थांभला, रत्नजडित तांहां मोहोल मेडी.

धर्मसभामां जहां, उग्रसेनजी तहां, संकरषणजी संग बेठा;

तांहां वासुदेव ने देवकीनंदन, राजराजेश्वर कृष्ण बेठा.

अक्रूर ओधव, वेदुर ने अरजुन, शीघ्र ऊभा थया हरने जाणी;

सोळ सहस्र शत आठ पटराणीओ, मध्य आव्या, शूलपाणि.

धाईने जई मळ्या, आसनेथी चळ्या, कर जोडीने कृष्णे सन्मान दीधुं;

बेसो सिंहासने, जोगीपति ! आसने, आज कारज मारुं सकळ कीधुं.

'भक्त-आधीन तमो छो सदा त्रिकमा', प्रसन्न थईने शिव बोल्या वाणी;

'भक्त अमारो भूतललोकथी आवियो, करो तेने कृपा दीन जाणी'.

भक्त उपर हवे दृष्टि-किरपा करो, नरसैंयाने निज दास थापो;

ते ज वेळा श्रीहरिए मुजने करुणा करी, हस्तकमल मारे शीश चांप्यो.

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