BhaktiVed
कृष्ण

वैष्णव नथी थयो तुं रे हरिजन नथी थयो तुं रे

भजनरचना: દયારામ (Dayaram)
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स्रोत
Gujarati Wikisource, https://gu.wikisource.org/wiki/વૈષ્ણવ_નથી_થયો_તું_રે_હરિજન_નથી_થયો_તું_રે (revision 204541)
स्रोत का विवरण
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वैष्णव नथी थयो तुं रे हरिजन नथी थयो तुं रे

वैष्णव नथी थयो तुं रे, हरिजन नथी थयो तुं रे,

शीद गुमानमां घूमे... वैष्णव टेक

हरिजनने जोई हैडुं न हरखे, द्रवे न हरिगुण गातां,

काम धाम चटकी नथी पटकी, क्रोधे लोचन रातां... वैष्णव १

तुज संगे कोई वैष्णव थाये, तो तुं वैष्णव साचो,

तारा संगनो रंग न लागे, तहां लगी तुं काचो... वैष्णव २

पर दुःख देखी हृदे न दाझे, पर निंदाथी नथी डरतो,

व्हाला नथी विठ्ठलशुं साचुं, हठे न हुं हुं करतो... वैष्णव ३

परोपकारे प्रीत न तुजने, स्वारथ छूट्यो छे नहीं,

कहेणी तेवी रहेणी न मळे, कहां लख्युं एम कहेनी... वैष्णव ४

भजवानी रुचि नथी मन निश्चे, नथी हरिनो विश्वास,

जगत तणी आशा छे जहां लगी, जगत गुरु तुं दास... वैष्णव ५

मन तणो गुरु मन करीश तो, साची वस्तु जडशे,

‘दया’ दुःख के सुख मान पण, साचुं कहेवुं पडशे... वैष्णव ६

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