BhaktiVed
ॐ

आदि अनादि छे वचन परिपूर्ण

भजनरचना: ગંગાસતી (Gangasati)
लिपि
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स्रोत
Gujarati Wikisource, https://gu.wikisource.org/wiki/આદિ_અનાદિ_છે_વચન_પરિપૂર્ણ (revision 199923)
स्रोत का विवरण
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आदि अनादि छे वचन परिपूर्ण

आदि अनादि छे वचन परिपूर्ण

वचनथी अधिक नहीं कांई रे,

वचन जाण्या थकी शुद्ध प्रेम जागे

ने सुरता निर्गुणमां समाय रे ... आदि अनादि

कर्मकांड एने नडे नहीं

जेने आव्यो वचननो विश्वास रे,

पगलुं भरे पण वचन तपासे ने

थई रहे गुरुजीना दास रे ... आदि अनादि

जनक विदेही भूली गयो ने

दीधो जेणे पेघडे पाव रे,

एक वरस तेमां रह्यो पोते

पछी बदल्यो वचननो भाव रे ... आदि अनादि

देह छतां तेने विदेही कीधो,

ए वचन तणो प्रताप रे,

गंगासती एम बोलियां पानबाई,

जेने नहीं त्रिविधनो ताप रे ... आदि अनादि

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