BhaktiVed
ॐ

अचळ वचन कोई दि’ चळे नहि

भजनरचना: ગંગાસતી (Gangasati)
लिपि
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स्रोत
Gujarati Wikisource, https://gu.wikisource.org/wiki/અચળ_વચન_કોઈ_દિ’_ચળે_નહિ (revision 199918)
स्रोत का विवरण
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अचळ वचन कोई दि’ चळे नहि

अचळ वचन कोई दि’ चळे नहि, ते तो अहोनिश गाळे भले वनमांय

सद्दगुरु सानमां परिपूरण समजीयां, तेने अहंभाव आवे नहि मनमां.

अचळ वचन कोई दि...

शरीर पडे पण वचन चूके नहि, गुरुजीना वेच्या ते तो वेचाय

ब्रह्मादिक आवीने मरने लिये परीक्षा, पण बीजो बोध नो ठेराय…

अचळ वचन कोई दि...

मरजीवा थईने कायम रमवुं पानबाई ! वचन पाळवुं सांगो पांग

त्रिविधीना तापमां जगत बळे छे, तेनो नहि लागे तमने डाघ…

अचळ वचन कोई दि...

भाई रे ! जीवन्मुक्तिनी दशा प्रगटशे, हाण ने लाभ मटी जाय

आशा ने तृष्णा एके नहि उरमां, पूरण निजारी ई कहेवाय…

अचळ वचन कोई दि...

द्रढता राखो तो एवी रीते राखजो, जेथी रीझे नकळंक राय

गंगासती एम बोलियां, तेने नहि माया केरी छांय…

अचळ वचन कोई दि...

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