BhaktiVed
ॐ

अखंड वरने वरी

भजनरचना: મીરાંબાઈ (Meera Bai)
लिपि
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स्रोत
Gujarati Wikisource, https://gu.wikisource.org/wiki/અખંડ_વરને_વરી (revision 204803)
स्रोत का विवरण
Text taken from the Wikisource transcription; script-converted to Devanagari

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अखंड वरने वरी

अखंड वरने वरी साहेली, हुं तो अखंड वरने वरी.

भवसागरमां महादुःख पामी, लख चोरासी फरी ... साहेली हुं. (1)

संसार सर्वे भयंकर काळो, ते देखी थरथरी.

कुटुंब सहोदर स्वार्थी सर्वे, प्रपंचने परहरी ... साहेली हुं. (2)

जनम धरीने संताप वेठ्या, घरनो ते धंधो करी,

संतजगतमां महासुख पामी, बेठी ठेकाणे ठरी ... साहेली हुं. (3)

सद्दगुरुनी पूरण कृपाथी, भवसागर हुं तरी,

बाई मीरां कहे प्रभु गिरिधर नागर, संतोना चरणे पडी ... साहेली हुं (4)

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