BhaktiVed
ॐ

जेसल करी ले विचार

भजनरचना: સતી તોરલ (Sati Toral)
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स्रोत
Gujarati Wikisource, https://gu.wikisource.org/wiki/જેસલ_કરી_લે_વિચાર (revision 223168)
स्रोत का विवरण
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जेसल करी ले विचार, माथे जमकेरो मार,

स्वपना जेवो आ संसार, तोरि राणी करे छे पोकार,

आवोने जेसलराय, प्रेमथकी आपण मळियें,

पूरा संत होय त्यां जइ भाळियें — टेक.

अनुभवी आव्यो छे अवतार, माथे सद्‌गुरुने धार,

जावु धणीने दरबार, बेडली उतारे भवपार— आवोने. १.

गुरुनां ज्ञाननो नहीं पार, भगती खेल खांडानी धार;

नुगरा शुं जाणे संसार, एनो एळे ग्यो अवतार— आवोने. २.

गुरुनी गति गुरुनी पास, जेवी कस्तुरीमां वास;

ज्यां नामनो विश्वास, दीननो नाथ पूरे आश— आवोने. ३.

नित नित नावाने जाय, कोयल उजळी नव थाय;

मावठाने मेघे कण नव थाय, गुनिकानो बेटो बाप केने केवा जाय— आवोने. ४.

देखादेखी करवाने जाय, आतमा दीवडियो दरशाय;

कूडिया कूवे पडवा जाय, मूरखा मुडियो गुमाय— आवोने. ५.

भेदु विना भेळां न थाय, ए तो अधुरियां कहेवाय;

एने कांय नूर न वरसाय, एनां कल्याण केम करी थाय.— आवोने. ६.

छीपुं समुदरमां थाय, एनी सफळ कमाइ थाय;

स्वातीना मेहुला वरसाय, त्यां तो साचां मोती थाय— आवोने. ७.

हीरा एरणमां ओराय, माथे घण केरा घाय;

फूटे फटकियां के’वाय, तेनी खरे खबरूं थाय— आवोने. ८.

चंदा सुरजनो उजाश, नवलख तारा एने पास,

पवन पाणीनो परकाश, चौद भुवन तेनी आश— आवोने. ९.

सवालाख कोथळियो बंधाय, पूरा गांधीडा कहेवाय ;

एवा संत विरला थाय, हीरा माणुक स्या वेराय— आवोने. १०.

एना धरमें दश अवतार, पांच सात नव बार;

करोडां तेतरीसा तार, रूषि अठ्याशी हजार— आवोने. ११.

सतयुग रत्नावर प्रहलाद, त्रेता तारा हरिश्चंद्र राय;

द्वापर द्रुपदी धर्मराय, कलियुग विंध्या ने बळिराय— आवोने. १२.

प्रेमनो पाट प्रेमनो ठाठ, प्रेमनो जोतनो प्रकाश;

तोरि राणी जाणो ते अंबार, साहेबो पूरे आपणी आश— आवोने. १३.

सतनी मांडवी बंधाय, प्रेमना पडदा रचाय;

जति सती तिहां भेळा थाय, तिहां नूरने परसाय— आवोने. १४.

हेते हरि गुण गाय, प्रेमे गुरु पूजा थाय ;

कोरी पावरीए वरताय, चार जुगनी वाणी सती तेरल राणी गाय— आवोने. १५.

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