BhaktiVed
ॐ

कळजुग आव्यो हवे कारमो

भजनरचना: ગંગાસતી (Gangasati)
लिपि
अक्षर आकार

स्रोत और संपादकीय समीक्षा · समीक्षा दर्ज नहीं है
स्रोत
Gujarati Wikisource, https://gu.wikisource.org/wiki/કળજુગ_આવ્યો_હવે_કારમો (revision 199927)
स्रोत का विवरण
Text taken from the Wikisource transcription; script-converted to Devanagari

उपलब्ध स्रोत और समीक्षा का विवरण यहाँ दिया जाता है। लिपि बदलना अनुवाद नहीं है। परंपराओं में पाठांतर हो सकते हैं।

कळजुग आव्यो हवे कारमो

कळजुग आव्यो हवे कारमो रे,

तमे सुणजो नर ने नार,

भक्ति धरम ते मांहे लोपाशे,

रहेशे नहि तेनी मर्याद .... कळजुग.

गुरुजीना कीधां चेलो नहीं माने

ने घेरघेर जगावशे ज्योत

नर ने नारी मळी एकांते बेसशे,

ने रहेशे नहि आत्म ओळखाण ... कळजुग.

विषयना वेपारमां गुरुजीने वामशे,

जूठां हशे नर ने नार,

आड धरमनी ओथ लेशे,

पण राखे नहि अलख ओळखाण ... कळजुग.

एक बीजाना अवगुण जोवाशे

ने करशे ताणवाण रे,

कजीया कलेशनी वृद्धि थाशे त्यारे,

नहि आवे धणी मारो द्वार .... कळजुग.

साचा मारा भईला अलख आराधे

ने धणी पधारे एने द्वार रे,

गंगा रे सती एम बोलियां रे,

तमे करजो साचानो संग ... कळजुग.

इस पाठ का वीडियो नहीं है।YouTube पर खोजें

ये भी पढ़ें