BhaktiVed
ॐ

मेदानमां जेणे मोरचो मांड्यो

भजनरचना: ગંગાસતી (Gangasati)
लिपि
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स्रोत
Gujarati Wikisource, https://gu.wikisource.org/wiki/મેદાનમાં_જેણે_મોરચો_માંડ્યો (revision 206733)
स्रोत का विवरण
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गंगासती

मेदानमां जेणे मोरचो मांड्यो

मेदानमां जेणे मोरचो मांड्यो ने

पकड्यो वचननो विश्वास रे,

चौद लोकमां कोईथी बीए नहीं

थई बेठां सदगुरुना दास रे ... मेदानमां

सान सदगुरुनी जे नर समज्यो,

ते अटके नहीं माया मांह्य रे,

रंगरूपमां लपटाय नहीं

जेने मळी गई वचननी छांय रे ... मेदानमां

रहेणीकरणी एनी अचळ कहीए

ए तो डगे नहींय जराय रे,

वचन समजवामां सदाय परिपुर्ण

तेने काळ कदी नव खाय रे ... मेदानमां

सोई वचन सदगुरुजीना घरना,

गम विना गोथां खाय रे,

गंगासती एम बोलियां रे पानबाई,

वचन न समज्या नरके जाय रे ... मेदानमां

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