BhaktiVed
ॐ

प्रेमरस पाने

भजनरचना: નરસિંહ મહેતા (Narsinh Mehta)
लिपि
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स्रोत
Gujarati Wikisource, https://gu.wikisource.org/wiki/પ્રેમરસ_પાને (revision 196194)
स्रोत का विवरण
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पद 3८ राग एज.

प्रेमरस पाने तुं मोरना पिच्छधर ! तत्त्वनुं तुं पणुं तुच्छ लागे;

दूबळा ढोरनुं, कुशके मन चळे, चतुरधा मुक्ति तो ए न मागे. —

प्रेम. १

प्रेमनी वात परीक्षित प्रीछ्यो नहि, शुकजीए समजीने रस संताड्यो;

ज्ञान वैराग्य कही, ग्रंथ पूरो कर्यो; मुक्तिनो मारग सीधो देखाड्यो. —

प्रेम. २.

मारीने मुक्ति आपी घणा दैत्यने, ज्ञानी, विज्ञानी, बहु मुनि रे जोगी;

प्रेमने जोग तो, व्रजतणी गोपिका, अवर विरला कोई भक्त भोगी. —

प्रेम. ३.

प्रेतने मुक्ति तो परम वल्लभ सदा, हेतुना जीवतो हेतु त्रुठे;

जन्मोजनम लीलारस गावतां, लाभनां वहाण जेम द्वार छूटे. —

प्रेम. ४.

में ग्रह्यो हाथ गोपीनाथ गरवातणो, अवर बीजुं कोइये न भावे;

नरसैंयो म्हामति गाय छे गुण कथी, जति सतिने तो सपप्ने न आवे. —

प्रेम. ५.

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