BhaktiVed
ॐ

सदगुरुना वचनना थाव अधिकारी

भजनरचना: ગંગાસતી (Gangasati)
लिपि
अक्षर आकार

स्रोत और संपादकीय समीक्षा · समीक्षा दर्ज नहीं है
स्रोत
Gujarati Wikisource, https://gu.wikisource.org/wiki/સદગુરુના_વચનના_થાવ_અધિકારી (revision 199993)
स्रोत का विवरण
Text taken from the Wikisource transcription; script-converted to Devanagari

उपलब्ध स्रोत और समीक्षा का विवरण यहाँ दिया जाता है। लिपि बदलना अनुवाद नहीं है। परंपराओं में पाठांतर हो सकते हैं।

सदगुरुना वचनना थाव अधिकारी

सदगुरु वचनना थाव अधिकारी

मेली दो अंतरनुं अभिमान,

मान मेलीने तमे आवो मेदानमां,

समजो गुरुजीनी शान रे ... सदगुरुना.

अंतर भांग्या विना उभरो नै आवे

नहीं थाय साचेसाची वात,

आंटी छूटे ज्यारे अंतर तणी, त्यारे

प्रभुजी देखाय साक्षात रे ... सदगुरुना.

सत्संग रस तो अगम अपार छे,

ए तो पीवे कोई पीवनहार,

तनमन केरी ज्यारे सुधबुध भूलाशे

त्यारे अरसपरस मळशे एकतार रे ... सदगुरुना.

धडनी उपर जेने शीश मळे महीं

एवो खेल छे आ खांडानी धार रे,

एम रे तमारुं तमे शीश उतारो

तो तमने रमाडुं बावन वार रे ... सदगुरुना.

हुं अने मारुं ए मननुं कारण पानबाई!

ए मन ज्यारे मटी जाय रे,

गंगा सती एम बोलियां, पानबाई,

त्यारे अंतरमां अलख देखाय रे ... सदगुरुना.

इस पाठ का वीडियो नहीं है।YouTube पर खोजें

ये भी पढ़ें