BhaktiVed
ॐ

शां शां रूप वखाणुं, संतो रे...

भजनरचना: ભાણ સાહેબ (Bhan Saheb)
लिपि
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स्रोत
Gujarati Wikisource, https://gu.wikisource.org/wiki/શાં_શાં_રૂપ_વખાણું,_સંતો_રે... (revision 206709)
स्रोत का विवरण
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अखो

शां शां रूप वखाणुं, संतो रे...

शां शां रूप वखाणुं,, संतो रे शां शां रूप वखाणुं?

चांदाने सूरज विना, मारे वायुं छे वहाणुं . --संतो.

नेजा रोप्या निकज धाममां वाजां अनहद वाजे;

त्यांहरिजन बेठा अमृत पीए, माथे छत्र विराजे.--संतो.

नूरतसूरतनी शेरीए, अनभे घर जोयुं,

झलमल ज्योते अपार छे, त्यां मुज मन मोह्युं. --संतो.

विना रे वादळ,विना वीजळी, जळसागर भरियुं.

त्यां हंसराजा क्रीडा करे, चा^चे मोतीडुं धरियुं. --संतो.

मानसरोवर झीलतां, तुं तो तारुं तपासे;

तेने तीरे वसे नागणी, जाळवजे नहि तो खाशे. --संतो.

झगमग ज्योत अपार छे, शून्यमं धून लागी;

अखो आनन्दशुं त्यां मळ्यो, भव भ्रमणा भांगी. --संतो.

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