BhaktiVed
कृष्ण

हरि हरि हरि हरि सुमिरन करो

कीर्तनरचना: सूरदास (Surdas)Kirtan; fast

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हरि हरि हरि हरि सुमिरन करो।

हरि चरणारविन्द उर धरो॥

हरि की कथा होइ जब जहँ, गंगा हू चलि आवै तहँ।

जमुना सिन्धु सरस्वती आवै, गोदावरी विलम्ब न लावै॥

हरि हरि हरि हरि सुमिरन करो।

सब तीरथ कोटि कोटि सर, सबै हरि की कथा सुनन कौ आवैं।

सूरदास भगवन्त भजन बिनु, नरक पड़े जम लोकहि जावैं॥

हरि हरि हरि हरि सुमिरन करो।

स्रोत: Surdas, Sursagar; text as commonly sung

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