BhaktiVed
कृष्ण

हरि जू की आरती बनी

आरतीरचना: सूरदास (Surdas)Haveli sangeet aarti

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हरि जू की आरती बनी।

आरति बनी हरि जू की, आरति बनी॥

सब सुरन की सुर नारि, आरति उतारतीं।

गावतीं मंगलचार, तान धुनि तान धुनी॥

हरि जू की आरती बनी।

कनक थार रतन जटित, दीपक जगमगात।

जगमगात अगर धूप, घन्ट रुनि झुनी॥

हरि जू की आरती बनी।

सूरदास प्रभु गिरिधर, गोपिन मन मोहत।

कोटि कन्दर्प छबि लखि, नागरी मनी॥

हरि जू की आरती बनी।

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स्रोत: Surdas, Sursagar (aarti pad); text as sung in Pushtimarg havelis

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