BhaktiVed
कृष्ण

जसोदा हरि पालनै झुलावै

भजनरचना: सूरदास (Surdas)Lori (lullaby) pad; Janmashtami jhula

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जसोदा हरि पालनै झुलावै।

हलरावै दुलरावै मल्हावै, जोइ सोइ कछु गावै॥

मेरे लाल को आउ निंदरिया, काहे न आनि सुवावै।

तू काहे नहिं बेगहिं आवै, तोको कान्ह बुलावै॥

जसोदा हरि पालनै झुलावै।

कबहुँ पलक हरि मूँदि लेत हैं, कबहुँ अधर फरकावै।

सोवत जानि मौन ह्वै कै रहि, करि करि सैन बतावै॥

जसोदा हरि पालनै झुलावै।

इहि अन्तर अकुलाइ उठे हरि, जसुमति मधुरै गावै।

जो सुख सूर अमर मुनि दुरलभ, सो नँद भामिनि पावै॥

जसोदा हरि पालनै झुलावै।

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स्रोत: Surdas, Sursagar (Bal-lila); text as commonly sung

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