BhaktiVed
कृष्ण

मैया मैं तो चन्द्र खिलौना लैहों

भजनरचना: सूरदास (Surdas)

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मैया मैं तो चन्द्र खिलौना लैहों।

जैहों लोटि धरनि पर अबहीं, तेरी गोद न ऐहों॥

सुरभी की सौं तोहि, सुनु मैया, अब न ससुरारी जैहों।

बाल कर्म कछु करत नहीं, मैं तुम्हरो दूध न पैहों॥

मैया मैं तो चन्द्र खिलौना लैहों।

लाल कहो कत धरनि लोटत, आज सब सुख पैहों।

तेरी सौं मेरे चन्दा मंगाइ दे, नहिं तो मैं अब रैहों॥

मैया मैं तो चन्द्र खिलौना लैहों।

सूरदास प्रभु सब मन मोहन, जसुमति चन्द दिखैहों।

थार में जल धरि चन्द दिखायो, लै लै खेलत हैहों॥

मैया मैं तो चन्द्र खिलौना लैहों।

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स्रोत: Surdas, Sursagar (Bal-lila); text as commonly sung

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