BhaktiVed
రాముడు

मन पछितैहै अवसर बीते

భజనరచన: गोस्वामी तुलसीदास (Goswami Tulsidas)

ఈ పాఠం ఇంకా సరిచూడబడలేదు.

मन पछितैहै अवसर बीते।

दुर्लभ देह पाइ हरिपद भजु, करम बचन अरु हीते॥

सहसबाहु दसबदन आदि नृप, बचे न काल बलीते।

हम-हम करि धन धाम सँवारे, अन्त चले उठि रीते॥

मन पछितैहै अवसर बीते।

सुत बनितादि जानि स्वारथरत, न करु नेह सबही ते।

अन्तहुँ तोहिं तजेंगे पामर, तू न तजै अबही ते॥

मन पछितैहै अवसर बीते।

अब नाथहिं अनुरागु जागु जड़, त्यागु दुरासा जी ते।

बुझै न काम अगिनि तुलसी कहुँ, बिषय-भोग बहु घी ते॥

मन पछितैहै अवसर बीते।

ఈ పాఠానికి వీడియో లేదు.YouTubeలో వెతకండి
మూలం: Tulsidas, Vinay Patrika, pad 202; Gita Press edition

ఇవి కూడా చదవండి