BhaktiVed
ॐ

Aa Itihas Jyare Panbaie Sambhalyo Re

BhajanAuthor: ગંગાસતી (Gangasati)
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Gujarati Wikisource, https://gu.wikisource.org/wiki/આ_ઈતિહાસ_જ્યારે_પાનબાઈએ_સાંભળ્યો_રે (revision 199922)
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Text taken from the Wikisource transcription; script-converted to Devanagari

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आ ईतिहास ज्यारे पानबाईए सांभळ्यो रे

आ इतिहास ज्यारे पानबाईए सांभळ्यो रे, त्यारे लाग्यां सतीने पाय

आज मने तमे पावन कीधी ने, अंगमां आनंद न माय रे...

आ इतिहास ज्यारे...

भाई रे ! मोहरूपी पडळ ऊघडी गयां रे, हवे बीजुं गोठे नहि कांई रे;

जगत सरवे मने जूठुं जणायुं ने, जाग्यो प्रेम उरमांय रे...

आ इतिहास ज्यारे...

भाई रे ! हवे मने आप अभ्यास करावो रे, ई रे मागुं वरदान रे;

भले रे तमे मारो मोह टाळ्यो ने, पवित्र तमारां दर्शन रे...

आ इतिहास ज्यारे...

भाई रे ! जेथी आवागमन नडे नहि ने, जीवदशा मटी जाय रे;

एवो उपदेश आपो मने रे, जेथी जीवन्मुक्त दरशाय रे...

आ इतिहास ज्यारे...

सरलवाणी गंगासतीनी सांभळी ने, पूरण प्रगटयो अधिकार रे;

गंगासती एम बोलियां रे, हवे लाग्यो वचनमां एकतार रे...

आ इतिहास ज्यारे...

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