BhaktiVed
ॐ

हमन है इश्क मस्ताना

भजनरचना: कबीर (Kabir)

इस पाठ की जाँच अभी बाकी है।

हमन है इश्क मस्ताना, हमन को होशियारी क्या।

रहें आज़ाद या जग से, हमन दुनिया से यारी क्या॥

जो बिछुड़े हैं पियारे से, भटकते दर-ब-दर फिरते।

हमारा यार है हम में, हमन को इन्तज़ारी क्या॥

खलक सब नाम अपने को, बहुत कर सिर पटकता है।

हमन गुरनाम साँचा है, हमन दुनिया से यारी क्या॥

न पल बिछुड़ें पिया हम से, न हम बिछुड़ें पियारे से।

उन्हीं से नेह लागी है, हमन को बेकरारी क्या॥

कबीरा इश्क का माता, दुई को दूर कर दिल से।

जो चलना राह नाज़ुक है, हमन सिर बोझ भारी क्या॥

इस पाठ का वीडियो नहीं है।YouTube पर खोजें
स्रोत: Kabir pad; text as commonly sung

ये भी पढ़ें