BhaktiVed
ॐ

हमन है इश्क मस्ताना

భజనరచన: कबीर (Kabir)

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हमन है इश्क मस्ताना, हमन को होशियारी क्या।

रहें आज़ाद या जग से, हमन दुनिया से यारी क्या॥

जो बिछुड़े हैं पियारे से, भटकते दर-ब-दर फिरते।

हमारा यार है हम में, हमन को इन्तज़ारी क्या॥

खलक सब नाम अपने को, बहुत कर सिर पटकता है।

हमन गुरनाम साँचा है, हमन दुनिया से यारी क्या॥

न पल बिछुड़ें पिया हम से, न हम बिछुड़ें पियारे से।

उन्हीं से नेह लागी है, हमन को बेकरारी क्या॥

कबीरा इश्क का माता, दुई को दूर कर दिल से।

जो चलना राह नाज़ुक है, हमन सिर बोझ भारी क्या॥

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మూలం: Kabir pad; text as commonly sung

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