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कृष्ण

कृष्ण

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270 पाठ
तुम बिन रह्यो न जायभजनपढ़ें तुम घर आज्यो होभजनपढ़ें तुं मारे चांदलीए चोंट्योभजनपढ़ें तुं सत्संगनो रस चाखभजनपढ़ें उधडकी ऊठिया वेगे विठ्ठल हरिभजनपढ़ें उमिया-इशनी मुजनेभजनपढ़ें उपाडी गांसडी वेठनी रेभजनपढ़ें वहाला मारा वृंदावनने चोकभजनपढ़ें वैकुंठ ढूंकडुं रेभजनपढ़ें वारी जाउं रे सुंदर श्याम! तमारा लटकानेभजनपढ़ें वाट जुए छे मीरां रांकडीभजनपढ़ें वृंदावन मोरली वागे छेभजनपढ़ें यदुवर लागत है मोहे प्यारोभजनपढ़ें यमुनामें कूद पड्यो कनैयोभजनपढ़ें साँवरिया म्हारी प्रीत निभाज्यो जीभजनपढ़ें मतवारो बादर आये रेभजनपढ़ें म्हारा रे गिरिधर गोपाल दूसरा ण कोईभजनपढ़ें आंखोमां ऊडे गुलालभजनपढ़ें चित्त तुं शीदने चिंता धरेभजनपढ़ें दामोदर! दुःखडा कापो रे!भजनपढ़ें हरि, जेवो तेवो हुं दास तमारोभजनपढ़ें हो वांसलडी !भजनपढ़ें काळज कोर्युं ते कोने कहीएभजनपढ़ें कानुडो कामणगारो रेभजनपढ़ें किये ठामे मोहनीभजनपढ़ें लोचन – मननो झघडोभजनपढ़ें मनजी ! मुसाफर रे ! चलो निज देश भणी !भजनपढ़ें मोरलीभजनपढ़ें ओ जशोदाजी !भजनपढ़ें ओ व्रजनारी !भजनपढ़ें पाओ प्रेमरस प्राणजीवनभजनपढ़ें प्रेमरसभजनपढ़ें शोभा सलूणा श्यामनीभजनपढ़ें शुं जाणे व्याकरणीभजनपढ़ें श्याम रंग समीपे न जावुंभजनपढ़ें उद्धवजी विचारो रे अंतर आपणेभजनपढ़ें