BhaktiVed
కృష్ణుడు

अब मैं नाच्यो बहुत गोपाल

భజనరచన: सूरदास (Surdas)

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अब मैं नाच्यो बहुत गोपाल।

काम क्रोध को पहिरि चोलना, कंठ विषय की माल॥

महामोह के नूपुर बाजत, निन्दा सबद रसाल।

भरम भर्यो मन भयो पखावज, चलत असंगत चाल॥

अब मैं नाच्यो बहुत गोपाल।

तृष्णा नाद करति घट भीतर, नाना विधि दै ताल।

माया को कटि फेंटा बाँध्यो, लोभ तिलक दियो भाल॥

अब मैं नाच्यो बहुत गोपाल।

कोटिक कला काछि दिखराई, जल थल सुधि नहिं काल।

सूरदास की सबै अविद्या, दूरि करो नन्दलाल॥

अब मैं नाच्यो बहुत गोपाल।

మూలం: Surdas, Sursagar (Vinay pad); text as commonly sung

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