BhaktiVed
कृष्ण

चरन कमल बन्दौं हरि राई

भजनरचना: सूरदास (Surdas)Opening pad; sung before kirtan

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चरन कमल बन्दौं हरि राई।

जाकी कृपा पंगु गिरि लंघै, अंधे को सब कछु दरसाई॥

बहिरो सुनै, मूक पुनि बोलै, रंक चलै सिर छत्र धराई।

सूरदास स्वामी करुनामय, बार बार बन्दौं तिहिं पाई॥

चरन कमल बन्दौं हरि राई।

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स्रोत: Surdas, Sursagar (Mangalacharan); text as commonly sung

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