BhaktiVed
కృష్ణుడు

चरन कमल बन्दौं हरि राई

భజనరచన: सूरदास (Surdas)Opening pad; sung before kirtan

ఈ పాఠం ఇంకా సరిచూడబడలేదు.

चरन कमल बन्दौं हरि राई।

जाकी कृपा पंगु गिरि लंघै, अंधे को सब कछु दरसाई॥

बहिरो सुनै, मूक पुनि बोलै, रंक चलै सिर छत्र धराई।

सूरदास स्वामी करुनामय, बार बार बन्दौं तिहिं पाई॥

चरन कमल बन्दौं हरि राई।

ఈ పాఠానికి వీడియో లేదు.YouTubeలో వెతకండి
మూలం: Surdas, Sursagar (Mangalacharan); text as commonly sung

ఇవి కూడా చదవండి