BhaktiVed
Krishna

Vansli

BhajanAuthor: દયારામ (Dayaram)
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Gujarati Wikisource, https://gu.wikisource.org/wiki/વાંસળી (revision 204536)
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वांसळी

वागे वृंदावनमां वांसळी रे ऊभो ऊभो वगाडे (क हा)न;

नादे वेधी मुनिवर पांसली रे नव रही कोने सान. वागे०

तरुनी शाखाओ झूमी रही रे, चरणे नमवाने काज;

वेली वृक्ष साथे झूली रही रे, (२)

भाग्य अमारां आज ! वागे०

जमनानीर चाले नहीं रे, मृगमन मोह ज थाय;

पंखी माळामां हाले नहीं रे, (२)

नाद सुणी न रहेवाय. वागे०

वाछरूं कान दई सांभळे रे, करे नहीं पयपान;

गायो गाळा तोडी तहां पळे रे, (२)

नाद सुणवाने कान. वागे०

फूल्यां कमळ जळ टाटडी रे, दीसे उदीओ छे भाण;

शंकर समाधि मेली रह्या रे, (२)

थयुं जगतने जाण. वागे०

काने पडीओ ते व्रजनारने रे, व्हालाजीनो रे नाद;

सांभळता तजी निज धामने रे, (२‌)

धाइ गया सौ साथ. वागे०

लीला केवी कुंजधामनी रे ! पवन थयो गतिभंग;

देवता वृष्टि करे प्रसन्न थइ रे (२‌)

देखी व्रजनो उमंग. वागे०

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