BhaktiVed
ॐ

అసలీ జే సంత హోయ తే

భజనరచన: ગંગાસતી (Gangasati)
లిపి
అక్షర పరిమాణం

మూలం మరియు సంపాదకీయ సమీక్ష · సమీక్ష నమోదు కాలేదు
మూలం
Gujarati Wikisource, https://gu.wikisource.org/wiki/અસલી_જે_સંત_હોય_તે (revision 199921)
మూల వివరాలు
Text taken from the Wikisource transcription; script-converted to Devanagari

అందుబాటులో ఉన్న మూల వివరాలు, సమీక్ష తేదీ ఇక్కడ చూపిస్తాము. లిపి మార్పు అనువాదం కాదు. సంప్రదాయ పాఠాంతరాలు ఉండవచ్చు.

असली जे संत होय ते

असली जे संत होय ते चळे नहीं कोई दि

कपट नहीं मन मांह्य जी,

गुरुजीना वचनोने परिपूर्ण समजे

प्रज्ञी पुरुष कहेवाय जी.

देह रे मूके पण वचन तूटे नहीं ने

गुरुजीना वेचाये वेचाय जी

ब्रह्मादिक आवी जेना पारखां रे लेवे तोये

आ मरजीवा जीवी जाय जी ... असली जे संत

अमरीया बनी जे नितनित खेले रे

मरवुं तो आळपंपाळ जी

त्रिविधिनां तापमां जगत बळे छे पण

एने लागे नहीं जरी जोने झाळ रे ... असली संत.

जीवनमरणनी फेर्युं जेणे टाळ्युं ने

लाभ ने हानि मटी जाय जी,

आशा ने तृष्णा जेने एके नहीं उरमां

भक्त परम ए कहेवाय जी ... असली संत

मनथी रे राजी तमे एम ज रहेजो

तो रीझे सदा नकळंक रायजी

गंगासती एम बोलिया रे पानबाई

असली रे संत ई गणाय जी ... असली जे संत

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