BhaktiVed
Ram

Jake Priy Na Ram Baidehi

BhajanAuthor: गोस्वामी तुलसीदास (Goswami Tulsidas)

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जाके प्रिय न राम बैदेही।

तजिये ताहि कोटि बैरी सम, जद्यपि परम सनेही॥

तज्यो पिता प्रहलाद, बिभीषन बंधु, भरत महतारी।

बलि गुरु तज्यो कंत ब्रज-बनितन्हि, भये मुद-मंगलकारी॥

जाके प्रिय न राम बैदेही।

नाते नेह राम के मनियत, सुहृद सुसेब्य जहाँ लौं।

अंजन कहा आँखि जेहि फूटै, बहुतक कहौं कहाँ लौं॥

जाके प्रिय न राम बैदेही।

तुलसी सो सब भाँति परम हित, पूज्य प्रान ते प्यारो।

जासों होय सनेह राम-पद, एतो मतो हमारो॥

जाके प्रिय न राम बैदेही।

Source: Tulsidas, Vinay Patrika, pad 174; Gita Press edition

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