BhaktiVed
ॐ

Santo Bhai Aai Gyan Ki Aandhi

BhajanAuthor: कबीर (Kabir)

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सन्तो भाई आई ज्ञान की आँधी रे।

भ्रम की टाटी सबै उड़ानी, माया रहै न बाँधी॥

हिति चित्त की द्वै थूँनी गिरानी, मोह बलेंडा टूटा।

त्रिस्ना छाँनि परी घर ऊपर, कुबुधि का भाँडा फूटा॥

सन्तो भाई आई ज्ञान की आँधी रे।

जोग जुगति करि सन्तौं बाँधी, निरचू चुवै न पानी।

कूड़ कपट काया का निकस्या, हरि की गति जब जानी॥

सन्तो भाई आई ज्ञान की आँधी रे।

आँधी पीछै जो जल बूठा, प्रेम हरी जन भींनाँ।

कहै कबीर भान के प्रगटे, उदित भया तम खीनाँ॥

सन्तो भाई आई ज्ञान की आँधी रे।

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Source: Kabir pad; text as commonly sung

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