BhaktiVed
Krishna

Man Re Parasi Hari Ke Charan

BhajanAuthor: मीराबाई (Meera Bai)

This text is still being proofread.

मन रे परसि हरि के चरन।

सुभग सीतल कमल कोमल, त्रिविध ज्वाला हरन।

मन रे परसि हरि के चरन।

जो चरन प्रह्लाद परसे, इन्द्र पदवी धरन।

मन रे परसि हरि के चरन।

जिन चरन ध्रुव अटल कीन्हे, राखि अपनी सरन।

मन रे परसि हरि के चरन।

जिन चरन ब्रह्माण्ड भेट्यो, नख सिखौ श्री भरन।

मन रे परसि हरि के चरन।

जिन चरन प्रभु परसि लीन्हे, तरी गौतम घरनि।

मन रे परसि हरि के चरन।

जिन चरन धरयो गोबरधन, गरब मघवा हरन।

मन रे परसि हरि के चरन।

दासि मीरा लाल गिरिधर, अगम तारन तरन।

मन रे परसि हरि के चरन।

Source: Meera Bai pad; standard Meera Padavali text as commonly sung

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