BhaktiVed
Krishna

Maiya Kabahun Badhaigi Choti

BhajanAuthor: सूरदास (Surdas)

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मैया कबहुँ बढ़ैगी चोटी।

किती बार मोहि दूध पियत भई, यह अजहूँ है छोटी॥

तू जो कहति बल की बेनी ज्यों, ह्वै है लाँबी मोटी।

काढ़त गुहत न्हवावत जैहै, नागिन सी भुइँ लोटी॥

मैया कबहुँ बढ़ैगी चोटी।

काचो दूध पियावति पचि पचि, देति न माखन रोटी।

सूरज चिरजीवौ दोउ भैया, हरि हलधर की जोटी॥

मैया कबहुँ बढ़ैगी चोटी।

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Source: Surdas, Sursagar (Bal-lila); text as commonly sung

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