BhaktiVed
ॐ

Jhini Jhini Bini Chadriya

BhajanAuthor: कबीर (Kabir)

This text is still being proofread.

झीनी झीनी बीनी चदरिया।

काहे कै ताना काहे कै भरनी, कौन तार से बीनी चदरिया॥

इंगला पिंगला ताना भरनी, सुषमन तार से बीनी चदरिया।

आठ कँवल दस चरखा डोलै, पाँच तत्त गुन तीनी चदरिया॥

झीनी झीनी बीनी चदरिया।

साँई को सियत मास दस लागे, ठोंक ठोंक कै बीनी चदरिया।

सो चादर सुर नर मुनि ओढ़ी, ओढ़ि कै मैली कीनी चदरिया॥

झीनी झीनी बीनी चदरिया।

दास कबीर जतन से ओढ़ी, ज्यों की त्यों धर दीनी चदरिया।

झीनी झीनी बीनी चदरिया॥

Source: Kabir pad; text as commonly sung in the Banaras tradition

Also read